मेरे शब्दों के मन से - Dark horse
Buy Newspaper 9 Template blogger

मेरे शब्दों के मन से

 

अपने शब्दों के आचमन से तुम्हें

उतना ही पवित्र और पूज्नीय बना

लेना चाहती हूँ...

जितनी श्रद्धा और विश्वास से मैं

तुम्हे अपना कहती हूँ,

मैं अनन्त भावनाओ की गहराई से 

तुम्हारे समक्ष जिन शब्दों की प्रार्थनाएं करती हूँ,

उनमें मैं तुमसे जो भी मांगती हूँ...

 उनपर स्वयं का सुरक्षित अधिकार रखती हूँ,

जिसे मैं कहूँ और सिर्फ तुम सुनो,

जहाँ दूसरा कोई भी शामिल न हो, 

वो चाहे कितना भी करीबी क्यों न हो...

मेरे क्षणभर की स्तुति में अपने संकल्प का

तुम पर मैं अपना एकाधिकार चाहती हूँ ।

Previous article
Next article

Leave Comments

Post a Comment

Articles Ads

Articles Ads 1

Articles Ads 2

Advertisement Ads