मुक्तिगाथा की दूसरी प्रस्तुति
#मुक्तिगाथा की दूसरी प्रस्तुति हुई #देशज में!
भारत को स्वाधीनता दिलाने में यूनाइटेड प्रोविंस अर्थात आज के उत्तरप्रदेश का महत्वपूर्ण स्थान था।
स्वाधीनता संग्राम की जो चिंगारी मेरठ में भड़की, वह लखनऊ कानपुर झाँसी से भड़कती हुई पूरे देश में फैल गई। मंगल पांडेय, रानी लक्ष्मीबाई, नाना साहब, बेगम हज़रत महल के शौर्य ने भारत में आज़ादी की लौ जगा दी। काकोरी कांड
चौरीचौरा कांड, ने देश में क्रांति ला दी। आजाद, बिस्मिल, सुखदेव,राजगुरु, अशफाकउल्ला, ये सभी हमारे देश की ऐसी पुण्यात्मायें हैं, जिनके आह्वाहन और प्राणाहुति से भारत का स्वाभिमान जाग गया और जन जन में ब्रिटिश साम्राज्य से मुक्ति पाने की अलख जाग गई।
इनके योगदान की गाथाएं गीत बनकर गाँव गाँव गूंजे, गाये गए लेकिन इन गीतों की लोकप्रियता से भयभीत हो कर ब्रिटिश सरकार ने इन गानों को प्रतिबंधित कर दिया था।
ऐसे ही प्रतिबंधित गीतों की गाथा है मुक्तिगाथा!
इसकी परिकल्पना, लेखन, निर्देशन, संगीत निर्देशन सब मैंने किया है।
लेकिन इसे साकार किया एक उत्कृष्ट कलाकारों की उत्साही टोली ने।
आभार पंडित धर्मनाथ मिश्र जी, सचिन कुमार, मुकेश, अमित, धर्मेंद्र।
बहुत ही सुंदर नृत्य संयोजन के लिए धन्यवाद एवं आशीष अनुज मिश्रा एवं आपके शिष्य शिष्याओं को,
आभार सपना और नीतेश, आपके संपुर्ण दल को सशक्त अभिनय व नृत्य के लिए।
आभार कविता, प्रीति, अंजु, रेणु, अलका, नीलेश गीतों में प्राण फूंकने के लिए।
आभार बंटी, सुंदर प्रकाश संयोजन के लिए
आभार ऋषभ सहयोग के लिए। #सोनचिरैया #sonchiraiya
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