हिंदी को आगे बढाने के लिए - Dark horse
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हिंदी को आगे बढाने के लिए

 

हाल में ही इन्दौर में हुए Lit चौक उत्सव में हमसे पूछा गया कि


"हिन्दी पट्टी में यह धारणा रही है कि हिन्दी वाले टेक्नोलॉजी, मार्केटिंग इत्यादि से ज्यादा कंपैटिबल नहीं है। आपको क्या लगता है हिन्दी वालों को आगे बढ़ने के लिए नई तकनीक, नए ट्रेंड्स को सीखना और अपनाना कितना ज़रूरी है ?"


उत्तर : 


" मैं टेक्नोलॉजी और इंटरनेट को लेकर बहुत ही ज्यादा उत्सुक रहता हूं, और इन्हें बहुत ज्यादा ताकतवर माध्यम भी मानता हूं।  मुझे लगता है हिन्दी का पीछे रहने का कारण भी यही रहा है कि हम हिन्दी पट्टी वाले लोग तकनीक में बहुत पीछे रहे हैं। मैं आपको इसका उदारहण बताता हूं -


अभी तकनीक की दुनिया में एक नया शब्द बहुत चर्चा में है " Web 3.0 " , अब आप Web 3.0 छोड़िए, हम ज्यादातर हिन्दी वालों को यह भी नहीं पता कि Web 1.0, Web 2.0 क्या है। पहले हमें इन्हें समझना ज़रूरी है।


Web 1.0 वो दौर था जब इंटरनेट नया नया आया था और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नहीं थे। हम इसे 2006-07 तक का समय मान सकते हैं। इस दौर में इंटरनेट के कंटेंट क्रिएटर सिर्फ़ वो लोग थे जिन्हें तकनीक की नॉलेज थी। वही लोग अपनी वेबसाइट या ब्लॉग चला रहे थे और ख़ुद को और लोगों को प्रकाशित कर रहे थे। इसमें दौर में पाठक को जो पढ़ना होता था उसे गूगल सर्च करता था और पढ़ लेता था।


Web 2.0 का दौर तब शुरू हुआ था जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने तेज़ी से लोगों तक पहुंचना शुरू किया। इन प्लेटफॉर्म पर कंटेंट क्रिएटर सिर्फ़ वो नहीं थे जिन्हें वेबसाइट या ब्लॉग चलाना आता है, यहां जिसके पास भी एक मोबाईल और इंटरनेट था, वो कंटेंट क्रिएटर की भूमिका निभा सकता था। जहां वेब 1.0 में अगर सिर्फ़ 100 कंटेंट थे, तो वेब 2.0 में वह संख्या 10000 से भी ज्यादा हो गई। यह दौर पहले से ज्यादा open, Participative और Relatively decentralised था। 


अब आते हैं Web 3.0 पर, आप ऊपर से यह तो समझ में आ गया होगा कि वेब 3.0 बाकी से ज्यादा open, Participative and decentralised होगा। इस दौर में आप यह मानके चलिए कि चंद लोगों या संस्थाओं का दबदबा नहीं होगा। इस दौर का सबसे नया उपक्रम है Bitcoins या डिजिटल करेंसी, जो किसी एक सरकार या संस्था के हाथ में नहीं है। हालांकि यह दौर अभी अभी शुरू हुआ है, यह किस तरह से लोगों के लिए नई opportunities लायेगा, यह समय ही बतायेगा। 


अब हम वापस आते हैं हिन्दी पट्टी पर। हमारे लोग आज भी Web 1.0 या Early Web 2.0 के दौर में ही हैं। हमारे लोग आज भी लोगों तक पहुंचने के अपनी वेबसाइट बनाने की सोचते हैं, जो कि 2007 तक पॉपुलर जरिया हुआ करता था। कुछ लोगों ने Web 2.0 का इस्तमाल करते हुए नई opportunity अपने लिए बनाई हैं लेकिन उसे आगे बढ़ाने की जगह वापस पीछे जा रहे हैं, जैसे वेब 2.0 से जुटाई जनता के लिए वो एक वेबसाइट बनाना चाहते हैं।


अगर हमें आगे बढ़ना है तो तकनीक को समझना पड़ेगा, नए ट्रेंड्स को अपनाना पड़ेगा। और पुराने तौर तरीकों से आगे बढ़कर एक नए दौर की शुरुआत करनी होगी। "


( आपके क्या विचार हैं इस विषय पर ? )

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